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अगर कोई दंपतà¥à¤¤à¤¿ संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ की इचà¥à¤›à¤¾ रखता है, और वह यह जानना चाहता है, कि पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठहमें कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिà¤. उसके लिठà¤à¤• आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• या देसी नà¥à¤¸à¥à¤–ा हम लेकर आठहैं.
हम आपके सामने पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठà¤à¤• और आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• योग लेकर आठहैं. यह योग 3 फलों से मिलकर बना हà¥à¤† है. जिसका उपयोग करने से पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ संà¤à¤µ हो जाती है.
जिन महिलाओं को पà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ ही होती हैं, और वह à¤à¤• पà¥à¤¤à¥à¤° की चाहत रखती है. उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस नà¥à¤¸à¥à¤–े को à¤à¤• बार जरूर अपनाना चाहिà¤.
बहà¥à¤¤ ही आसान है.
हम आपको उन तीनों फलों की पहचान बताà¤à¤‚गे.
उनसे कैसे नà¥à¤¸à¥à¤–ा तैयार किया जाता है. इस संबंध में à¤à¥€ चरà¥à¤šà¤¾ करेंगे.
उसका पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कैसे और कब करना चाहिà¤.
दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ यह तीनो के तीनो फल पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ समय से à¤à¤¾à¤°à¤¤ की धरती पर पैदा होते आ रहे हैं. यह फल गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में बड़ी आसानी से मिल जाते हैं.
यह बड़े यूनिक फल है. मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से यह जड़ी बूटियों के रूप में ही पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में आते हैं.
पहला फल : गूलर
गूलर पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ समय से ही à¤à¤¾à¤°à¤¤ में पाया जाता है.
इस पर फूल नहीं आते. इसकी शाखाओं में से फल उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होते हैं.फल गोल-गोल अंजीर की तरह होते हैं. इसमें से सफेद-सफेद दूध निकलता है.
इसके और à¤à¥€ बहà¥à¤¤ सारे नाम à¤à¤¾à¤°à¤¤ में पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ है, जो कि आपकी सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ पर डिसà¥à¤ªà¥à¤²à¥‡ हो रहे हैं.
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ समय से ही गूलर का à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ में काफी महतà¥à¤µ है. इसकी लकड़ियों का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— हवन में à¤à¥€ किया जाता है. इसका फल, लकड़ी और छाल औषधि के रूप में à¤à¥€ काम आते हैं.
दूसरा फल : पाकर
पाकर का फल : पाकर का फल à¤à¥€ गूलर के फल की तरह तने पर ही आता है. यह देखने में à¤à¥€ गà¥à¤²à¤° की तरह ही लगता है. पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ बंगाल में यह बहà¥à¤¤à¤¾à¤¯à¤¤ में पाठजाते हैं.
इस फल को इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ में green Burmese Grapes कहते हैं.
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